१८८९ में अमेरिका की बात हैं। एक युवक को व्यापार में बहुत नुकसान उठाना पड़ा.
उसपर बहुत कर्ज चढ़ गया। तमाम जमीन जायदाद गिरवी रखना पड़ी . दोस्तों ने भी मुंह फेर लिया।
जाहिर हैं वह बहुत हताश था। कही से कोई राह नहीं सूझ रही थी।
एक दिन वह एक पार्क में बैठा अपनी परिस्थितियो पर चिंता कर रहा था।
आशा की कोई किरण दिखाई न देती थी।
बुजुर्ग ने चिंता का कारण पूछा तो उसने अपनी सारी कहानी बता दी।
तभी एक बुजुर्ग वहां पहुंचे। कपड़ो से और चेहरे से वे काफी अमीर लग रहे थे।
मैं तुम्हे नहीं जानता,पर तुम मुझे सच्चे और ईमानदार लग रहे हो. इसलिए मैं तुम्हे दस लाख डॉलर का कर्ज देने को तैयार हूँ.”
बुजुर्ग बोले -” चिंता मत करो. मेरा नाम John D. Rockefeller है.
फिर जेब से चेकबुक निकाल कर उन्होंने रकम दर्ज की और उस व्यक्ति को देते हुए बोले, “नौजवान, आज से ठीक एक साल बाद हम ठीक इसी जगह मिलेंगे. तब तुम मेरा कर्ज चुका देना.”
इतना कहकर वो चले गए.
युवक shocked था. Rockefeller
तब अमरीका के सबसे अमीर व्यक्तियों में से एक थे.
युवक को तो भरोसा ही नहीं हो रहा था कि उसकी लगभग सारी मुश्किल हल हो गयी.
उसके पैरो को पंख लग गये.
पर मैं खुद पर भरोसा नहीं कर रहा हूँ.
घर पहुंचकर वह अपने कर्जो का हिसाब लगाने लगा.
उन्नीसवी सदी की शुरुआत में 10 लाख डॉलर बहुत बड़ी धनराशि होती थी और आज भी है.
अचानक उसके मन में ख्याल आया. उसने सोचा एक अपरिचित व्यक्ति ने मुझपे भरोसा किया,
उस दिन के बाद युवक ने खुद को झोंक दिया.
यह ख्याल आते ही उसने चेक को संभाल कर रख लिया.
उसने निश्चय कर लिया की पहले वह अपनी तरफ से पूरी कोशिश करेगा,
पूरी मेहनत करेगा की इस मुश्किल से
निकल जाए. उसके बाद भी अगर कोई चारा न बचे तो वो चेक इस्तेमाल करेगा.
बस एक ही धुन थी,
वह चेक लेकर Rockefeller की राह देख रहा था।
किसी तरह सारे कर्ज चुकाकर अपनी प्रतिष्ठा को फिर से पाना हैं.
उसकी कोशिशे रंग लाने लगी. कारोबार उबरने लगा, कर्ज चुकने लगा. साल भर बाद तो वो पहले से भी अच्छी स्थिति में था.
निर्धारित दिन ठीक समय वह बगीचे में पहुँच गया.
लोगो को जॉन डी . Rockefeller के रूप में चेक बाँटता फिरता हैं. ”
जब वे पास पहुंचे तो युवक ने बड़ी श्रद्धा से उनका अभिवादन किया।
उनकी ओर चेक बढाकर उसने कुछ कहने के लिए मुंह खोल ही था कि एक नर्स भागते हुए आई
और
झपट्टा मारकर वृद्ध को पकड़ लिया।
युवक हैरान रह गया।
अब वह युवक पहले से भी ज्यादा हैरान रह गया.
नर्स बोली, “यह पागल बार बार पागलखाने से भाग जाता हैं
और
करते करते थक जाएगी ।"
जिस चेक के बल पर उसने अपना पूरा डूबता कारोबार फिर से खड़ा किया,वह
फर्जी था.
पर यह बात जरुर साबित हुई कि वास्तविक जीत हमारे इरादे, हौंसले और प्रयास में ही होती हैं।
हम सभी यदि खुद पर विश्वास रखे तो यक़ीनन
किसी भी असुविधा से, परिस्थिति से निपट सकते है.
आपको परेशान
" हमेशा हँसते रहिये,
एक दिन ज़िंदगी भी

